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Bahá’í International Community Representative Offices

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सन्देश

विश्व न्याय मंदिर

बाब के जन्म की द्विशताब्दी के अवसर पर

विश्‍व न्याय मंदिर

अक्टूबर 2019

उन सब के प्रति जो एक नई भोर के अग्रदूत को सम्मान देने आए हैं

परम प्रिय मित्रगण,

हमारे साथ विचार करें। जब कभी भी दुनिया में एक नये दिव्य शिक्षक का आगमन होता है, एक ऐसा व्यक्तित्व जिसकी शिक्षायें आने वाली शताब्दियों तक मानव की सोच और उसके विचारों को आकार देती हैं - ऐसे नाटकीय, हलचल मचा देने वाले पल में हम क्या उम्मीद करेंगे ?

जैसा कि दुनिया के महान धर्मों के ग्रंथों में लिखित है, ऐसे प्रत्येक शिक्षक का आना एक निर्णायक घटना होती है जो सभ्यता के विकास को प्रेरित करती है। प्रत्येक ने जो आध्यात्मिक प्रोत्साहन पूरे इतिहास-काल के दौरान प्रदान किया है उसने मानव-सहयोग के दायरे को वंश-परम्परा से जनजाति की प्रथा, नगर-राज्य से राष्ट्र तक बढ़ाने में समर्थ बनाया। और उनके प्रत्येक महान ‘शिक्षक’ ने वचन दिया कि उचित समय पर एक अन्य दिव्य विभूति आयेंगे, ‘जिनके’ आगमन की प्रत्याशा की जानी चाहिये और जिनका प्रभाव दुनिया को पुनर्गठित करेगा। तब इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि बाब के अवतरण ने, ‘जिनके’ जन्म के दो सौ साल पूरे होने का उत्सव हम मना रहे हैं, उस देश में जहाँ ‘उनका’ जन्म हुआ था, एक अभूतपूर्व उत्तेजना फैला दी। सभी ऐसी ‘विभूतियों’ के आगमन की तरह ‘उनके’ अवतरण ने भी शक्तिशाली आध्यात्मिक शक्तियों को तेजी के साथ निर्मुक्त किया - लेकिन साथ में कोई चमत्कार नहीं था। इसके बदले, देर शाम एक साधारण फारसी निवास में धर्म के एक अध्येता और उनके युवा ’मेज़बान‘ के बीच एक सम्वाद हुआ, जिस दौरान उस ’मेज़बान‘ ने यह प्रकट किया कि वही वह ‘प्रतिज्ञापित अवतार’ है, वह दिव्य ‘शिक्षक’ हैं जिनकी खोज उनके अतिथि कर रहे हैं। “मुझे ध्यान से देखो” उन्होंने कहा, “मेरे अलावा क्या कोई अन्य ‘व्यक्ति’ हो सकता है जिसकी खोज तुम कर रहे हो ?” यही ‘युवा’ ‘बाब’ जिनका यशोगान उस विभूति के रूप में हम करते हैं जिनके आगमन ने एक हज़ार साल के अंतराल के बाद, दिव्य मार्गदर्शन का प्रकाश मानव-संसार पर एक बार फिर फैलाया है।

उस प्रथम पल से वह सब कुछ प्रकट हुआ जो घटित हुआ है। बाब की लेखनी से विपुल मात्रा में उनके लेखो का प्रवाह बह चला, जिसने गहन सत्य को उजागर किया, उनके समय में व्याप्त अंधविश्वासों को समाप्त किया, लोगों को यह हिदायत देते हुये कि समय के महत्व को वे समझें, उनके अग्रणी लोगों के पाखण्ड की भर्त्‍सना की और आचरण के एक उच्च स्तर के लिये लोगों का आह्वान किया। अपनी एक प्रमुख कृति में उन्होंने घोषणा की, ’हे धरती के लोगों, सत्यतः ईश्वर का समुज्ज्वल प्रकाश तुम्हारे मध्य आया है, ताकि तुम शांति की राह पर चलने के लिये पथ-प्रदर्शन पा सको और ईश्वर की अनुमति से अंधकार से प्रकाश की ओर तथा सत्य के इस विस्तृत पथ पर चल सको।” उनका प्रभाव असाधारण तीव्रता के साथ फैला और फारस से बाहर तक फैल गया। उनके अनुयायियों की बढ़ती हुई संख्या उनके अपार साहस के कार्यों और उनकी भक्ति को देख प्रेक्षक चकित थे। बाब के जीवन वृतांत ने अनेक जिज्ञासुओं के मन में उत्सुकता पैदा कर दी कि फारस की यात्रा करें और इस सम्बन्ध में और अधिक जानकारी प्राप्त करें तथा उस विभूति को कलात्मक श्रद्धांजलि देने के लिये प्रेरित किया, जो विश्‍व-पटल पर शीघ्रता से उभरा और जिसका दुखांत हुआ।

जिस सामाजिक परिवेश में बाब अवतरित हुये उसके अंधकार के विपरीत बाब के प्रकाश की दीप्ति और भी चमकी। 19वीं शताब्दी का फारस अब अपने उन महिमाशाली दिनों से बहुत दूर भटक आया था जब उसकी सभ्यता दुनिया के लिये ईर्ष्‍या का विषय हुआ करती थी। अब अज्ञानता थी; निरर्थक धार्मिक सिद्धांत को चुनौती देने वाला कोई नहीं था; अनियंत्रित भ्रष्टाचार के कारण असमानता का बोलबाला हो गया था। धर्म जो कभी फारस की समृद्धि का आधार हुआ करता था, अब एक ऐसा निकाय बन चुका था, जो प्रेरणादायी चेतनारहित था। हर आने वाले वर्ष ने वशीभूत लोगों को भ्रम और निराशा दिये। शोषण अपनी पराकाष्ठा पर पहुँच चुका था। और तब एक वासंती बयार के रूप में बाब आये, लोगों को शुद्ध और पवित्र बनाने के लिये, हठधर्मी युग की मुरझाई व दिशाविहीन परम्पराओं को उखाड़ फेंकने और उनके नेत्रों से धूल साफ करने जो भ्रम के कारण अंधे हो चुके थे। लेकिन बाब का एक विशेष प्रयोजन था। वह लोगों को बहाउल्लाह, के आगमन के सन्निकट होने का संकेत देना चाहते थे। बहाउल्लाह उन ‘दो नक्षत्रों’ में दूसरे थे जो मानवजाति के लिये एक नयी रौशनी लाने के लिये आये। यह बाब का सर्वाधिक आग्रहपूर्ण विषय था “जब बहा का दिवानक्षत्र शाश्वतत्व के क्षितिज पर देदीप्यमान हो तब तुम्हारे लिये यह आवश्यक होगा कि उसके सिंहासन के समक्ष स्वयं को उपस्थित करो”, ‘उन्होंने’ अपने अनुयायियों को निर्देश दिया।”

इस प्रकार बाब और उनसे भी अधिक भव्यता के साथ बहाउल्लाह ने एक ऐसे समाज तथा युग को प्रकाशित किया जो अंधकार से घिरा था। सामाजिक विकास के एक चरण की उन्होंने शुरूआत की: सम्पूर्ण मानव परिवार को एक करने का चरण। उन्होंने जो आध्यात्मिक शक्तियां दुनिया में निर्मुक्त कीं उसने प्रयास की हर दिशा में नवजीवन का संचार किया, जिसका परिणाम उस रूपान्तरण में स्पष्ट देखने को मिलता है जो हुआ है। अपरिमेय रूप से भौतिक सभ्यता का विकास हुआ; विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में विस्मयकारी विकास देखने को मिले; मानवजाति के संचित ज्ञान के द्वार खुले। और समाज के उत्थान तथा प्रगति और शासन तथा बहिष्करण की प्रणालियों को खत्म करने के लिये बहाउल्लाह द्वारा दिये गये सिद्धांतों को व्यापक रूप से स्वीकृति मिली। उनकी इस शिक्षा पर विचार करें कि मानवजाति एक है, अथवा स्त्रियां पुरूषों के समान हैं या यह कि शिक्षा सब के लिये हो, या फिर यह कि पूर्वाग्रहों पर आधारित व काल्पनिक सिद्धांतों से ऊपर उठकर सत्य की विवेकपूर्ण खोज की जानी चाहिये। सभी देशों में दुनिया के लोगों का एक बड़ा भाग अब इन मौलिक मूल्यों में अपनी आस्था रखता है।

फिर भी, इन मूल्यों के विरूद्ध जो दलीलें थीं और जो पूर्व में गम्भीर विचारकों तक ही सीमित थीं वे भी समाज में पुनः उठ खड़ी हुई हैं - एक अनुस्मारक कि आदर्शों को मजबूत करने के लिए आध्यात्मिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है। किसी चीज को सिद्धांतः मानना एक बात है: पूरे हृदय से इसको मानना नितांत ही अलग, समाज को इस तरह तैयार करना कि वह इसे सामूहिक रूप से प्रदर्शित कर सके, तो और भी कठिन है। तथापि विश्‍व में उभर रहे समुदायों, जो बहाउल्लाह की शिक्षाओं पर आधारित हैं, का यही उद्देश्य है। यह समुदाय उन शिक्षाओं के प्रकाश को, अपने चारों ओर के समाज को रूग्ण कर रही विकट समस्याओं पर केन्द्रित करने का प्रयत्न कर रहा हैं; वे आध्यात्मिक बोध पर केन्द्रित व्यावहारिक कार्य-योजनायें बना रहे हैं। यह वे समुदाय हैं जो सभी परिस्थितियों में बालकों तथा बालिकाओं दोनों की शिक्षा के समर्थक हैं; वे आराधना की विस्तारित अवधारणा को मानते हैं, जो सेवा की भावना से किये गये कार्य को समाविष्ट करती है; जो सदा बहने वाले प्रेरणा के स्रोत के रूप में, आध्यात्मिक आकांक्षाओं को देखता है, न कि स्वार्थ को, और यह व्यक्ति तथा सामाजिक रूपांतरण को विकसित करने एक संकल्प को जन्म देता है। वे आध्यात्मिक, सामाजिक तथा भौतिक विकास को एक साथ लाना चाहते हैं। इससे ऊपर, ये वह समुदाय हैं जो मानवता की एकता के लिये प्रतिबद्धता द्वारा स्वयं को परिभाषित करते हैं। इस बात को मानते हुये कि मानवजाति के सदस्य के रूप में पहचान अन्य किसी पहचान अथवा संगठनों पर वरीयता पाती है, वे दुनिया के सभी जनों द्वारा प्रतिनिधित्व की जाने वाली विविधता को महत्व देते हैं। मानवता की भलाई संबंधी साझा चिंता से उत्पन्न वैश्विक चैतन्यता की आवश्यकता की पुष्टि करते हैं, और धरती के समस्त जनों को अपना आध्यात्मिक भाई तथा बहन मानते हैं। इन समुदायों की सदस्यता मात्र से संतोष न कर, बहाउल्लाह के अनुयायी समान सोच वाली आत्माओं को यह सीखने के लिए अपने साथ बुला रहे हैं कि किस प्रकार ‘उनकी’ शिक्षाओं को अमल में लाया जाए।

यह हमें अपने कार्य के मूल में लाता है। जो विषय हमारे हाथ में हैं, चुनौतीपूर्ण हैं और स्पष्टवादिता चाहता है। विश्‍व में अनेक कुलीन तथा प्रशंसनीय कार्य हैं और वे एक विशिष्ट परिप्रेक्ष्य में उठते हैं, प्रत्येक की अपनी विशेषता है। क्या बहाउल्लाह का धर्म मात्र उनमें से एक है ? अथवा यह सार्वभौमिक है, समस्त मानवता के उच्चतम आदर्शों को मूर्तरूप देता हुआ ? आखिरकार, एक धर्म जो चिरस्थाई न्याय तथा शांति का स्रोत होता है - विशिष्ट स्थान अथवा विशिष्ट समुदाय के लिए नहीं, बल्कि सभी स्थानों और सभी जनों के लिए - अवश्य ही अक्षय होना चाहिए, अवश्य ही दिव्य चेतनता का स्वामी होना चाहिए जो इसे सभी सीमाओं को लांघने तथा मानवता के जीवन के समस्त आयामों को सम्मिलित करने दे। अंत में, इसमें मानव हृदय को रूपांतरित करने की शक्ति होनी चाहिए। तब बाब के अतिथि की भाँति हम ध्यानपूर्वक देखें। क्या बहाउल्लाह के धर्म में यही गुण नहीं हैं ?

यदि बहाउल्लाह द्वारा लाई शिक्षायें वह हैं जो मानवता को एकता के उच्चतम शिखरों तक विकास करने योग्य बनायेंगी तब हमें सही प्रत्युत्तर पाने के लिए आत्मा को खोजने की आवश्यकता है। जनसाधारण जिन्होंने बाब को पहचाना, शौर्यता के लिए आमंत्रित किये गये, और उनका भव्य उत्तर इतिहास में अंकित हो गया। प्रत्येक वह जो विश्‍व की दशा, तथा दुराग्रही बुराईयाँ जो इसके निवासियों के जीवन को घेरे हुये हैं, के प्रति सजग है, बहाउल्लाह के निस्वार्थ तथा दृढ़ सेवा के आह्वान पर ध्यान दे जो कि वर्तमान युग के लिये शौर्यता है। विश्‍व को अनगिनत आत्माओं के प्रयासों के अतिरिक्त और क्या बचायेगा जिनमें से प्रत्येक मानवता की भलाई को अपनी मुख्य, अपनी प्रभुत्व रखने वाली चिंता बनाये।

विश्‍व न्याय मंदिर