विश्व के धर्मों के संस्थापकों की शिक्षाओं ने साहित्य, वास्तुकला, कला और संगीत में अपार उपलब्धियों को प्रोत्साहित किया है। उन्होंने तर्क, विज्ञान और शिक्षा के बढ़ावे को पोषित किया है। उनके नैतिक सिद्धांत मानवीय संबंधों को नियमित व उन्नत करने वाले अन्तर्राष्ट्रीय कानून कायदों में परिवर्तित हो गये हैं। इन बेजोड़ रूप से सम्पन्न व्यक्तियों को बहाई लेखों में ईश्वर के अवतार
उल्लिखित किया गया है, और इनमें शामिल हैं (अन्य के साथ) कृष्ण, मूसा, ज़रथुस्त, बुद्ध, ईसा मसीह, मुहम्मद, बाब और बहाउल्लाह। इतिहास इस बात के असंख्य उदाहरण प्रस्तुत करता है कि किस प्रकार इन विभूतियों ने सम्पूर्ण जन समुदायों में प्रेम, क्षमा, निर्माण, अपार साहस, पूर्वाग्रह पर विजय प्राप्त करने व सामान्य हित के लिये त्याग करने की क्षमता को जागृत और मानवता की सहज दुर्जनता के आवेग को अनुशासित किया है। इन उपलब्धियों को मानवजाति की सामान्य आध्यात्मिक विरासत के रूप में मान्य किया जा सकता है।
बहाई धर्म का आरम्भ ईश्वर द्वारा दो दिव्य संदेशवाहकों को दिये गये मिशन के साथ हुआ। ये संदेशवाहक थे बाब और बहाउल्लाह।
दो शताब्दी पूर्व अक्टू बर १८१९ में जन्मे, बाब ने उद्घोषणा की कि वे उस सन्देश के वाहक हैं जिसकी नियति मानवता के जीवन को, जो कि एक नए युग की दहलीज पर खड़ा है, रूपांतरित करने की है। उन्होंने स्त्रियों की स्थिति तथा गरीबों के प्रारब्ध में सुधार के लिए, आध्यात्मिक और नैतिक उद्धार का आह्वान किया। अपने अनुयायियों को स्वयं के जीवन को रूपांतरित करने और वीरता के महान कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए, उन्होंने एक विशिष्ट तथा स्वतंत्र धर्म की स्थापना की। बाब का ध्येय बहाउल्लाह के लिए पथ तैयार करना था।
बहाउल्लाह – दैविक रूप से उत्प्रेरित नैतिक शिक्षक, जिन्होंने मानवता को युग-युग से मार्गदर्शित किया है, की श्रृंखला में नवीनतम – ने उद्घोषित किया कि मानवता अब दीर्घ प्रतीक्षित वयस्कता के स्तर के समीप आ रही है : सामाजिक व्यवस्थापन की वैश्विक स्तर पर एकता। वे मानवमात्र की एकता की परिकल्पना प्रस्तुत करते हैं, एक नैतिक ढांचा और शिक्षाएं जो कि विज्ञान व धर्म के सामंजस्य पर आधारित हैं, जो कि प्रत्यक्ष रूप से आज की समस्याओं को संबोधित करती हैं। वे मानव के सामाजिक उद्विकारन के अगले स्तर की राह बताते हैं। वे दुनिया के लोगों के लिये एक एकीकरण का वृत्तांत प्रस्तुत करते हैं, जो कि वास्तविकता को समझने के लिये हमारी वैज्ञानिक समझ के अनुरूप है। वे हमारी सार्वलौकिक मानवता को स्वीकार करने के लिये, अलगाव व पूर्वाग्रह समाप्त करने के लिये और एक साथ आने के लिये हमारा आह्वान करते हैं। ऐसा करके सभी लोग और प्रत्येक सामाजिक समूह अपने स्वयं के भविष्य के निर्माण, और अन्तत: एक शान्तिपूर्ण वैश्विक सभ्यता के नायक हो सकते हैं।
बहाउल्लाह और बाब के संग्रहीत लेखों को ‘उनके’ अनुयायियों के द्वारा ईश्वर का प्रकटीकरण माना जाता है। वे बहाई धर्म का आधार बनाते हैं। ‘उनके’ लम्बे समय के निर्वासन के दौरान बहा उल्लाह ने 100 पुस्तकों से अधिक के बराबर लेख प्रकट किये थे। इस विशाल सागर से नीचे कुछ उद्धरण दिये गये हैं।
‘पुरातन अस्तित्व’ के ज्ञान के द्वार मनुष्य के समक्ष सदैव से बंद रहे हैं और सदैव बंद रहेंगे। ‘उसके’ पावन दरबार में किसी मानव की समझ की पहुंच कभी नहीं होगी। फिर भी, ‘उसकी’ कृपा के संकेत और ‘उसकी’ प्रेमपूर्ण दयाल ुता को प्रमाण के रूप में, ‘अपने’ मनुष्यों के बीच ‘उसके’ दिव्य मार्गदर्शन के दिवा नक्षत्रों’, ‘उसकी’ दिव्य एकता के प्रतीकों को प्रकट किया और यह आदेश दिया कि इन पावन ‘अस्तित्वों ‘ का ज्ञान ‘उसके’ स्वयं के ‘स्व’ ज्ञान के समान है।
(बहाउल्लाह के पावन लेखों से चयन)
ये पावन दर्पण... सभी, ‘उसके’ प्रतिनिधि हैं जो कि ब्रह्माण्ड का केन्द्रीय ‘प्रकाशग्रह’, उसका ‘सार-तत्व’ और अन्तिम उद्देश्य है। उससे उनका ज्ञान व शक्ति उत्पन्न होती है, उससे उनकी प्रभुसत्ता व्युत्पन्न होती है ।
(किताब-ए-ईकान)
अचूक मार्गदर्शन के प्रकाश द्वारा अग्रसर होते हुए, और सर्वोच्च प्रभुसत्ता से युक्त होकर उन्हें ‘उनके’ शब्दों के प्रयोग, उनकी त्रुटिरहित दया और ‘उनके’ प्रकटीकरण की शुद्ध करने वाली बयार के द्वारा प्रत्येक आकांक्षित हृदय तथा ग्रहणशील चेतना को दुनियावी चिन्ताओं व सीमाओं के कूड़े व धूल से स्वच्छ कर देने के लिये अधिकृत किया गया है।
(बहाउल्लाह के पावन लेखों से चयन)
यह अनन्त काल से अनन्त काल तक, ईश्वर का अपरिवर्तनीय धर्म है।
(एकता का मंडप-वितान)
यह वह ‘दिन’ है जब ईश्वर की सर्वाधिक उत्कृष्ट कृपाएं मनुष्यों पर बरसा दी गई हैं; वह ‘दिन’ जब उसकी महान दया सभी सृजित वस्तुओं पर उडेल दी गई है। यह विश्व के सभी लोगों के लिये आवश्यक है कि अपने मतभेद मिटा दें और पूर्ण एकता व शांति के साथ ‘उसकी’ देख-रेख और प्रेमपूर्ण दयालुता के वृक्ष की छाया तले निवास करें।
(बहाउल्लाह के पावन लेखों से चयन)
प्रभु ने सम्पूर्ण विश्व की निरोगता के लिये जो सर्वश्रेष्ठ उपचार तथा सर्वाधिक शक्तिशाली साधन उपलब्ध कराया है, वह उसके सभी लोगों का एक ही सार्वभौतिक ध्येय, एक ही सामान्य धर्म में संघटित हो जाना है।
(युगावतार के आह्वान)